बीज उपचार: धनिये के बीज शिज़ोकार्प होते हैं। दोनों हिस्सों को अलग करने के लिए धीरे से रगड़ें, गर्म पानी में 12–24 घंटे भिगोएँ, फिर गीले कपड़े में लपेटकर पूर्व-अंकुरण करें जब तक कि अधिकांश बीज फट न जाएँ और सफेद जड़ें न दिखने लगें।
बुवाई का समय: इष्टतम वृद्धि तापमान 15–20°C है। वसंत और शरद ऋतु सबसे अच्छे मौसम हैं। गर्मियों में छाया दें और सर्दियों में सुरक्षा दें।
मिट्टी: ढीली, उपजाऊ, अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी जिसका pH 6.0–7.5 हो।
बुवाई की विधि: ड्रिल या ब्रॉडकास्ट करें, 0.5–1 सेमी मिट्टी से ढकें, नम रखें। अंकुर लगभग 7–15 दिनों में निकलते हैं।
पौधों की छँटाई: जब पौधे 3–5 सेमी ऊँचे हों तो पौधों को पतला करें, 3–5 सेमी की दूरी रखें ताकि भीड़भाड़ से बचा जा सके।
पानी और उर्वरक: वृद्धि के दौरान मिट्टी को नम रखें। पौधे 10 सेमी तक पहुँचने के बाद 1–2 बार तेज़ी से काम करने वाला नाइट्रोजन उर्वरक डालें।
कटाई: बुवाई के 30–60 दिन बाद तैयार, जब पौधे 15–20 सेमी ऊँचे हों। देर से कटाई करने पर बोल्टिंग हो सकती है और स्वाद खराब हो सकता है।